चटरू के जंगल में घेरा…Jaish का टॉप कमांडर सैफुल्लाह भी मारा गया

Saima Siddiqui
Saima Siddiqui

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में रविवार को बड़ा काउंटर-टेरर ऑपरेशन सामने आया। चटरू के घने जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन संदिग्ध आतंकी मारे गए। अधिकारियों के मुताबिक, मारे गए आतंकियों में प्रतिबंधित संगठन Jaish-e-Mohammed से जुड़ा टॉप कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल बताया जा रहा है।

ऑपरेशन संयुक्त रूप से Indian Army, Jammu and Kashmir Police और Central Reserve Police Force ने चलाया।

कैसे शुरू हुई मुठभेड़?

सूचना मिली थी कि जंगल के भीतर कुछ आतंकी छिपे हुए हैं। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों पर अचानक फायरिंग की गई। जवाबी कार्रवाई में मुठभेड़ शुरू हुई, जो कई घंटों तक जारी रही।

बताया जा रहा है कि एक खानाबदोश झोपड़ी में आग लगने के बाद अंदर छिपे आतंकियों के जले हुए शव बरामद हुए। उनकी पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड की पुष्टि की प्रक्रिया जारी है।

हथियार और सर्च ऑपरेशन

मौके से दो AK-47 राइफल, गोला-बारूद और अन्य संदिग्ध सामग्री बरामद की गई है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इलाके को पूरी तरह सील कर दिया गया है।

ड्रोन, सर्विलांस उपकरण और स्निफर डॉग्स की मदद से आसपास के क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। आशंका है कि नेटवर्क के अन्य सदस्य आसपास छिपे हो सकते हैं।

क्यों संवेदनशील है चटरू इलाका?

किश्तवाड़ का चटरू क्षेत्र पहले भी आतंकी गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है। घना जंगल और दुर्गम भौगोलिक स्थिति इसे छिपने के लिए अनुकूल बनाती है।

इसी वजह से यहां समय-समय पर कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (CASO) चलाए जाते रहे हैं।

प्रशासन की अपील

अधिकारियों ने स्थानीय नागरिकों से अफवाहों से बचने और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। कुछ मार्गों पर एहतियातन आवाजाही सीमित की गई है।

घने जंगलों में छिपे नेटवर्क अब सिर्फ बंदूक से नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी से भी ट्रैक किए जा रहे हैं। ड्रोन और डिजिटल इंटेलिजेंस के दौर में “जंगल कवर” पहले जैसा सुरक्षित नहीं रहा।

काउंटर-टेरर ऑपरेशंस अब सिर्फ फिजिकल नहीं, बल्कि टेक-ड्रिवन गेम बन चुके हैं।

यह ऑपरेशन बताता है कि संवेदनशील इलाकों में निगरानी लगातार जारी है। सुरक्षा एजेंसियों का फोकस संभावित खतरों को समय रहते निष्क्रिय करना है।

फिलहाल क्षेत्र में ऑपरेशन जारी है और आगे की जानकारी आधिकारिक ब्रीफिंग के बाद स्पष्ट होगी।

गौरक्षा से गृहस्थी तक… और बिट्टू भाई की बारात लौटी खाली हाथ!

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